Tuesday, 5 August 2014

मुझे मांफ कर देना (a very short story in hindi - Mujhe Maaf Kar Dena)

"मुझे माफ़ कर देना", ये सुनते ही मानो मेरे अंदर एक करंट सा दौड़ गया। सारे मतभेदों के बावजूद, अपने पिता को ख़ुद से माफ़ी माँगते देख मानो मुझ पर घड़ों पानी पड़ गया हो।
“आप ऐसा क्यों कह रहे है पापा, आप क्यों माफ़ी माँगेंगे? सारी गलती मेरी है और आप माफ़ी मांग रहे है?” मैं सिर्फ़ इतना ही कह पाया।
उस क्षण ये अहसास हुआ की मेरे अंदर अपने पिता के लिए कितना प्रेम एवं सम्मान भरा था। मतभेदों की वजह से वो कुछ दब सा गया था। पर आज सारे बांध टूट गए थे। पिता के एक वाक्य ने मुझे अंदर तक झकझोर कर वो दबा हुआ प्रेम और सम्मान बाहर निकाल दिया था।
अब और अनादर नहीं कर सकता मैं अपने पिता की। बस यही एक बात रह गयी थी मेरे दिलो दिमाग में। अब कोई मतभेद या दुराव भरी बात याद ना रही। जी चाहा की उनके पैरों पर गिरकर माफ़ी मांग लू। पर सिर्फ़ रोते हुए उनके गले ही लग पाया।
दोनों की आँखों से बहते आंसू हमारे मतभेदों को जाने कहा बहा ले गए।

- विनय कुमार पाण्डेय 26 मार्च 2014
Binay Kumar Pandey 26 March 2014