Sunday, 18 January 2015

Perumal Murugan - The Author is Dead, Long Live the Author

Do you know about the sudden death of Perumal Murugan, the author? Don’t worry, the Perumal Murugan, teacher is still alive, and will continue to live. But people have killed Perumal Murugan, the Author. This is clearly a major attack on Freedom of Speech, where people have forced the author to commit suicide. It sounds confusing, so let me put some light on him. 

Perumal Murugan is / was a Tamil Nadu-based writer, who has ended his writing career by announcing the death of Perumal Murugan, the author. His post, as reported by media (because I was not able to view his profile on Facebook), read, "Author Perumal Murugan is dead. Only the teacher Perumal would be alive. People could have issues with my other books, that's why I've decided to withdraw them all...I shall pay due compensation to publishers..Don't indulge in protests and let me go."

Saturday, 17 January 2015

व्यंग चित्र (A short story in hindi)

"पापा, आज भी आप ऑफिस चल दिए? आपको याद हैं ना अपना वादा?"

"हाँ बेटी, अच्छे से याद है, शाम को घर आकार आपके स्कूल के प्रोजेक्ट के लिए हम एक अच्छा सा चित्र बना देंगे।"

"और पापा, मुझे वो आपके अख़बार वाले कार्टून जैसे चित्र नहीं चाहिए। मुझे वो अच्छे नहीं लगते हैं। पता नहीं क्यों आप ऐसे कार्टून क्यो बनाते है!"

"बेटी, तुम अभी छोटी हो, जब थोड़ी बड़ी हो जाओगी तब समझ जाओगी। वो कार्टून बच्चों के लिए नहीं बड़ों के लिए होते है।"

"पर बड़े लोग तो कार्टून पसंद नहीं करते! तभी तो अक्सर आपके बारे में भी बुरा भला कहते रहते है। फिर क्यों आप उनके लिए कार्टून बनाते हो?"

Thursday, 15 January 2015

रेस्त्राँ (A Short Story)

बाहर बारिश हो रही थी। उस बारिश में दो बच्चे भीगते हुए नाच रहे थे। उनकी मस्ती बारिश की बूँदों के साथ इधर उधर छिटक रही थी। भीगने से बचने के लिए मैंने रेस्त्राँ के अंदर शरण ली। अंदर बैठते हुए एक चाय की मांग की। आज की घटनाओं से मेरा मन खिन्न हो चला था। उन दिनों कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा था। फिर आज का दिन तो शायद मेरे लिए बहुत ही खराब था। चाय के इंतज़ार में बैठे मेरा दिमाग अपने जीवन की परेशानियों उलझ गया।  वैसे तो अकेले बैठ कर बहुत सी अलग अलग कहानियाँ अपने आस पास देखने को मिलती है। परंतु रेस्त्राँ की उस भिड़ में भी मेरा मन कहीं और भटका हुआ था। 

Saturday, 10 January 2015

TnT – Taranath Tantrik – City of Sorrows

I read both part of Taranath Tantrik - City of Sorrow, and to summarize it, I can only say that I just can’t wait for the third installment. Brilliant story, keeps you gripped till the last page in both part. I will not discuss spoilers here. The story is about a Psychic Taranath Tantrik working with his friends Shankar, a CID office, Sneha, a TV journalist and  Vibhuti, a horror novelist, in an investigation, where someone is trying to change the City of Joy Kolkata into City of Sorrows. 

First part shows glimpse into Taranath’s past, and cut to present day for main story to develop. The second part again shows villain’s past, and then move to current day. So, the first one introduced TnT to us, and started chain of events which makes the story. Then second part introduced the villain to us, and the story progressed.  I liked this type of storytelling, which gives you a glimpse of main character’s past, and then jumps directly to the story. Shamik Dasgupta has once again written a brilliant story. For those who are not aware, Taranath is a character created by Bibhuti Bhushan Bandopadhyay (Pather Panchali fame). The origin of Taranath is not touched, but Shamik has taken the character into current day and weaved the story around him. 

Friday, 9 January 2015

Charlie Hebdo - Freedom to Live, and not Freedom of Speech!!!!

I don't support derogatory cartoons, and last year I was opposing the series made by Aseem Trivedi, which shows our national symbols in a very derogatory way. But I can never support terrorism and killing people! I have problem with lots of people who post loads of rubbish on their wall, say insulting things in newspapers or TV etc. But I don't go out and kill them! I don't support Charlie Hebdo, but I strongly oppose the attack and murders! 

Sunday, 4 January 2015

गर्व

सर्दियों की वह अलसाई सुबह। ऐसा लग रहा था मानो सुबह भी देर तक सोना चाह रही हो। आकाश धीरे धीरे लाल उजाला फैलाने लगा था। मैं रात भर की अपनी नौकरी के बाद घर की ओर जा रहा था। कहने को सुबह में अलसायापन था। परंतु कुछ लोग अपने कार्यो में लग चुके थे। कही अख़बार वाले गट्ठर लेकर अपनी दुकान लगाने में जुटे थे, तो कही सफ़ाई वाले झाड़ू लेकर सड़क साफ़ कर रहे थे। मुंबई में सर्दियाँ हलकी फुलकी ही होती है। यहाँ दिल्ली वाली कड़ाके की ठंड नहीं पड़ती। फिर भी भोर में इतनी ठंड तो रहती है की आप अपने में सिमट जाए। 

Thursday, 1 January 2015

तुशा – कहानियाँ भावनाओं की

आप सभी को नव वर्ष २०१५ की हार्दिक शुभकामनाएँ. 


नव वर्ष के इस अवसर पर मैं अपना फेसबुक पेज तुशा आप लोगो के समक्ष रख रहा हूँ. मुझे लिखने का शौक़ हैं, परंतु कभी अपनी रचना को किसी के साथ साझा नहीं किया. गाहे बगाहे अपने ब्लॉग पर अपनी लिखी हुई कहानियाँ प्रेषित कर देता था. परंतु शायद ही किसी ने उन कहानियों को पढ़ा हो. गत वर्ष अक्टूबर के महीने में यह ख़याल आया की क्यों न फेसबुक पर एक पृष्ठ बनाया जाए, सिर्फ़ उन कहानियों के लिए. ब्लॉग पर तो कहानियों के अलावा और भी बहुत कुछ होता है. ऐसा प्रतीत हुआ की शायद मैं उन लिखे हुए शब्दों को राहत दूँगा, एक ऐसे मंच पर लाकर जहाँ बहुत से लोगो की पहुँच उन तक होगी. इससे पहले मुझे लगता था की शायद मेरा इस तरह से सभी के सामने उन कहानियों को लाना ठीक नहीं होगा. परंतु उन शब्दों में छिपे भावों को अगर मैं बंद रखता हूँ, तो यह उनके साथ अन्याय होगा. अपनी झिझक एवं शर्म को दरकिनार करते हुए यह फ़ैसला लिया गया की अब उन कहानियों को कैद में नहीं रखा जाएगा.