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Popular posts from this blog

Sholay - Special Edition DVD of Alternate Version

HAPPY NEW YEAR 2011 TO ALL!
This is my 50th post on this Blog, and I never thought I can post upto 50 when I started. I wanted to post this in December 2010, as my last post of the year. But somehow, the time taken in research as well as year end holidays delayed it, and now we are with this, my 50th post, about Sholay Special Edition DVD and Alternate Version, as the first post this year.

Sholay! The name is enough! Yes, I am talking about Sholay the movie! The most famous movie of Indian film industry ever! There are so much written about Sholay, that I don't think I can add any new information in the already known knowledge about this movie! It’s a cult movie! Even today, after 35 years of its release, people still remember the characters, not just the main characters, but small guest appearance characters such as Surma Bhopali or Jailor, Sambha, Kalia as well! We still refer Sholay dialogues in day to day conversations! So, if people know so much and remember this much about any…

भोर का तारा - कविता (Bhor Ka Tara, a poem)

भोर का तारा, प्रतिक है समाप्त होती रात्रि का।
आने वाली सुबह का, नए दिन की शुरुआत का।
जो लगभग समाप्त हो गया, उस अँधियारे युग का।
एक आशा भरी नयी शुरुआत, नए प्रारंभ का।
जीवन के आकाश पर जल्द ही बिखरने वाली नयी उम्मीदों का।

कारवाँ – ग्राफिक नॉवेल (हिंदी)

याली ड्रीम्स की अँग्रेजी में प्रकाशित और प्रशंसित ग्राफिक नॉवेल कारवाँ अब हिंदी में उपलब्ध हो गयी है। आजकल के सभी नए कॉमिक्‍स प्रकाशक अपनी किताबें अँग्रेजी में ही प्रकाशित करते है। यह उनकी विवशता है, क्योंकि नए प्रकाशक के पास उत्तम कहानी और चित्रांकन तो है, परंतु प्रकाशित पुस्तकों के वितरण का उपयुक्त साधन नहीं है। उन्हें कॉमिक कान या फिर ऑनलाइन स्‍टोर्स पर निर्भर रहना पड़ता है। फिर उत्तम श्रेणी की कहानी, कला एवं रूप-सज्जा देने पर पुस्तक का मूल्य भी अधिक होता है। हिंदी में पाठकों की संख्या तो है, परंतु अधिक पैसे खर्च करके नए प्रकाशक की कॉमिक्‍स लेने वाले पाठक कम है। ऊपर से बिना देखे, ऑनलाइन खरीदने वाले तो और भी कम है। ऐसे में अँग्रेजी के पाठक तुलनात्मक रूप से अधिक हैं। यही कारण है कि आज हरेक प्रकाशक अँग्रेजी में ही अपनी कॉमिक्‍स प्रकाशित कर रहा है। भले ही कहानियाँ शुद्ध देशी है, पर भाषा विदेशी है। यह एक विडंबना है, जिसे आज प्रकाशक और हिंदी पढ़ने वाले पाठक, दोनों को झेलना पड़ता है।

ऐसा नहीं है कि हिंदी में कॉमिक्‍स एकदम प्रकाशित नहीं होती। राज कॉमिक्‍स आज भी हिंदी में कॉमिक प्रकाशित कर…