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Showing posts from 2015

समर शेष है

समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याघ्र, जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध।
ना जाने क्यों दिनकर जी की यह कविता आज बहुत याद आ रही हैं। शायद यह कविता अधूरी है। आज सिर्फ़ व्याध नहीं है, बल्कि व्याध के साथ खड़े लोगो का हुजूम भी है, जो उन्हें शाबाशी देता है, और दूसरों को तटस्थ रहने या फिर बहलाने का काम भी करता है। वह स्वयं कुछ नहीं करते, बस व्याघ्र का पक्ष लेकर उन्हें रक्षक घोषित करवाने में मदद करते है। वह ऐसे लोग है, जिन्हे उत्तर प्रदेश की घटना एक दुर्घटना लगती है, और साथ में मीडिया पर इस दुर्घटना को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप भी लगाते है। वह ऐसे भी लोग है जो इस आतंकवाद के लिए पीड़ित परिवार को ज़िम्मेवार ठहरा रहे है। मैं अधिक नहीं लिख पाऊँगा, क्योंकि मैं स्वयं तटस्थ वाली श्रेणी में आता हूँ। शायद मुझे आज इस सांप्रदायिकता और धर्मांधता के खिलाफ़ लड़ाई शुरू कर देनी चाहिए। पर मैं ठहरा एक साधारण इंसान, दो वक़्त की रोटी कमा कर अपने और अपने परिवार का पेट पालने वाला, यदि समर में कूद गया, तो मेरे परिवार का क्या होगा! इसी स्वार्थ की वजह से मैं यह अन्याय देखकर भी चुप रह जाता हूँ। यहाँ फेसबु…

सुरक्षा भुगतान (Short story in Hindi)

एक  समय की बात हैं। एक राज्य में विदेश से एक व्यापारी आया। उसने राजा से वहाँ अपना व्यापार करने की अनुमति माँगी। राजा ने अनुमति दे दी एवं कहाँ कि उनके मंत्री इस राज्य में व्यापार करने के नियम बता देंगे। व्यापारी ने मंत्री से मुलाक़ात की एवं सभी नियम समझ लिए। उन नियमों के अलावा मंत्री ने उस व्यापारी को यह भी बता दिया था कि उस राज्य में व्यापार करने पर कुछ खास किस्म के कर देने पड़ेंगे, राजकीय अनुमति हेतु कर, उत्पादक गुणवत्ता जांच में पारित होने हेतु कर एवं सरकारी महकमों की अलग अलग किस्म की जांच से सुरक्षा हेतु कर। यह सभी कर अघोषित थे एवं बिना किसी रसीद के देने पड़ते थे। विदेशी व्यापारी ने सभी शर्तें मंज़र कर अपना व्यापार “निशाले” के नाम से शुरू किया। बहुत जल्दी ही उसका व्यापार चल निकला और लोग उसके बनाए उत्पादों को पसंद करने लगे। फिर वह व्यापारी विदेश से ही अपना यहाँ का व्यापार देखने लगा। यहाँ उसने कुछ अधिकारी नियुक्त कर दिये थे, जो उसके व्यापार की देखभाल करते थे। धीरे धीरे “निशाले” के नए नए उत्पाद बाज़ार में आने लगे, और लोगो में इन उत्पादों की प्रसिद्धि इतनी बढ़ गई कि लोग “निशाले” को बा…

कारवाँ – ग्राफिक नॉवेल (हिंदी)

याली ड्रीम्स की अँग्रेजी में प्रकाशित और प्रशंसित ग्राफिक नॉवेल कारवाँ अब हिंदी में उपलब्ध हो गयी है। आजकल के सभी नए कॉमिक्‍स प्रकाशक अपनी किताबें अँग्रेजी में ही प्रकाशित करते है। यह उनकी विवशता है, क्योंकि नए प्रकाशक के पास उत्तम कहानी और चित्रांकन तो है, परंतु प्रकाशित पुस्तकों के वितरण का उपयुक्त साधन नहीं है। उन्हें कॉमिक कान या फिर ऑनलाइन स्‍टोर्स पर निर्भर रहना पड़ता है। फिर उत्तम श्रेणी की कहानी, कला एवं रूप-सज्जा देने पर पुस्तक का मूल्य भी अधिक होता है। हिंदी में पाठकों की संख्या तो है, परंतु अधिक पैसे खर्च करके नए प्रकाशक की कॉमिक्‍स लेने वाले पाठक कम है। ऊपर से बिना देखे, ऑनलाइन खरीदने वाले तो और भी कम है। ऐसे में अँग्रेजी के पाठक तुलनात्मक रूप से अधिक हैं। यही कारण है कि आज हरेक प्रकाशक अँग्रेजी में ही अपनी कॉमिक्‍स प्रकाशित कर रहा है। भले ही कहानियाँ शुद्ध देशी है, पर भाषा विदेशी है। यह एक विडंबना है, जिसे आज प्रकाशक और हिंदी पढ़ने वाले पाठक, दोनों को झेलना पड़ता है।

ऐसा नहीं है कि हिंदी में कॉमिक्‍स एकदम प्रकाशित नहीं होती। राज कॉमिक्‍स आज भी हिंदी में कॉमिक प्रकाशित कर…

The Ban Culture!

I am in favor of censorship in movies, television and any other medium which is exposed to kids. But the real reason behind that are kids, as they are not mature and we need to decide what they should and should not consume in the name of entertainment. I am not in favor of censorship for adults. Which means my support for censorship is only for ratings, to provide us detail on what to expect, and if that is suitable for kids. If we are mature enough to elect our government, how can the same government decide what we should or should not do? I am not interested in Porn, but I don’t regularly eat Beef as well. That does not mean it should be banned! Because I know, today it is Beef and Porn, tomorrow it would be something which will directly impact me!! I should not wait for that tomorrow to come, and protest now. 
I didn’t go out and search for beef in Mumbai, but I am sure I will find it for a premium price. Gutka or chewing tobacco is banned as well, but you go to almost any cigare…

फाँसी (A short story in Hindi)

उसकी फाँसी की सज़ा तय हो चुकी थी। बीस वर्षों कि कानूनी ज़द्दोज़हद के पश्चात अब बचने की कोई उम्मीद नहीं थी। परसों उसे फाँसी होनी थी। आज उससे मिलने उसकी 21 साल की बेटी आ रही थी। आख़िरी बार वह उससे 3 साल पहले मिली थी, और आज तक उसके अपनी बेटी के कहे शब्द याद थे। 
"आपने अपना रास्ता ख़ुद चुना है, और मेरे या माँ के बारे में सोचे बिना चुना है। आपका रास्ता आपको मुबारक हो। मुझे आपसे यह नहीं समझना है कि आपने 300 लोगो की जान किस वजह से ली है। मुझे नहीं लगता कि मैं आपकी वजह को समझ पाऊँगी। मुझे अपनी ज़िंदगी जीना है, और आपके नाम की वजह से मुझे हर जगह घृणा और दुत्कार का सामना करना पड़ा है। आज से मैं अपने आप को आपसे अलग कर रही हूँ। आपको जो सही लगा वह आपने किया, अब मुझे जो सही लग रहा है, वो मैं कर रही हूँ। मैंने आपसे सफ़ाई नहीं माँगी और मुझे आपको किसी तरह की सफ़ाई देने की जरूरत नहीं है। मेरा खुदा जानता है कि मैंने आपसे कितना प्यार किया है, कि मैं आपको बेगुनाह समझती रही हूँ। जब भी मुझे एक आतंकवादी के बेटी कहा जाता था, मैं आपके लिए लड़ी हूँ। पर अब और नहीं। मैं अपने खुदा से आपके लिए दुआ माँगूँगी की …

माँ (A short story in Hindi)

आज मेरे कलकत्ता प्रवास का आख़िरी दिन था। कल फिर ट्रेन पकड़ कर वापस मुंबई आना था और समान बांधने की तैयारी की जा रही थी। इस बार की छुट्टियों में और कुछ हुआ हो या नहीं, मुझे यह पता चल गया था कि मुझे शुगर और ब्लड प्रेशर दोनों है। अब दवाइयाँ शुरू हो चुकी थी और उम्र भर चलनी थी। माँ पिछले 3 घंटों से गायब थी। मैंने माना किया था कि इतनी दोपहर में कही जाने की जरूरत नहीं है। मैं मुंबई जा रहा था, वहाँ हर वह चीज़ मिलती है जो कलकत्ता में मिलती है। मैंने माँ को साफ़ कह दिया था की मैं समान नहीं बढ़ाऊँगा। फिर भी माँ कही बाहर निकाल गई थी। वह जानती थी कि यदि मुझे पता चला तो मैं जाने नहीं दूँगा, इसलिए चुप चाप बिना बताए चली गयी थी। इसी चक्कर में अपना मोबाइल भी नहीं ले गई थी। घर में सभी परेशान थे। मैं चिल्ला रहा था कि जो भी वो लाएगी बेकार जाएगा क्योंकि मैं कुछ भी ले जाने वाला नहीं हूँ। घर में सब मेरे गुस्से को जानते थे, इसलिए समझाने की कोशिश कर रहे थे। उनका कहना था कि माँ आख़िर माँ होती है, बस उस पर चिल्लाना मत। समान नहीं ले जाना है, मत ले जाओ, पर चिल्ला चिल्ली मत करना। 
जब माँ आई तो मेरा गुस्सा उसका गर्म…

Pray for Nepal and Don't play politics over tragedy

We just had a tragedy in Nepal and some part of India. Thousands of people lost their life and thousands more were injured. There is loss of property worth millions. It really a sad situation and we should pray for those who suffered in recent earthquake. But it’s more saddening that some people are actually trying to take advantage of this tragedy!! When I see post about praising some institute or person, on what they have done for victims, along with some bad language used for specifically targeted religion or groups or people asking what they are doing, it negate on whatever good these institutions or people are doing. If you are doing some good work just to show others and make fun of them, it cannot be called good work. Below is one such example. I praise our Army for reaching out to victims in record time for rescue. Our government is also responsible for this quick action, and they should be praised too, including our PM. But that does not mean some cheap people start posting f…

Net Neutrality or अंतर्जाल (नेट) निष्पक्षता

आप लोगो ने यह शब्द कई जगह पढ़ा या सुना होगा। आजकल भारत में यह शब्द सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। अर्थात ट्रेडिंग कर रहा है। लोग इसके बारे में फेसबुक या ट्विटर पर पोस्ट कर रहे है। हमारी ट्राई ने भी अपने वेब साइट पर लोगो से सलाह माँगी है। अँग्रेज़ी में बहुत लेख मिल जाएँगे इसके बारे में। सोचा क्यों न हिंदी पढ़ने वाले लोगो के लिए साधारण भाषा में इसकी व्याख्या कर दी जाये। शायद यह जानकारी आपके लिए उपयोगी हो। 
नेट निष्पक्षता क्या है?
नेट निष्पक्षता का अर्थ है, एक मुक्त इंटरनेट, जिसके किसी भी हिस्से को देखने/पढ़ने/सुनने के लिए सिर्फ़ एक प्रकार के साधन की आवश्यकता हो। अर्थात डाटा, किसी भी प्रकार का डाटा, समान माना जाये, और उसमें इसलिए कोई भेद ना किया जाये की वह कमेंट है, या वीडियो है या फोटो है। साधारण शब्दों में, आज आप अपने घर पर इंटरनेट लेते है, या फिर अपने मोबाइल फ़ोन पर इंटरनेट लेते है। आप उसके लिए पैसे देते है। घर पर ब्रॉडबैंड के अलग अलग डाटा रफ़्तार यानि स्पीड के पैकेज है, आप शायद वाई फाई भी लगा ले। वैसे ही मोबाइल पर भी कई पैकेज है, 2जी 3जी या फिर जल्द ही आने वाला एलटीई 4जी। एक बार हमने प…

पच्चीस वर्ष बाद (Hindi Story)

आज सुबह की डाक से मिले पत्र ने मुझे चौंका दिया। पुरानी यादें ताज़ा हो गई।  मानस पटल पर चल-चित्र कि भाँति मेरे नागपुर में गुज़ारे दिन सामने आने लगे। 
पच्चीस वर्ष पूर्व की वह सुबह जब चलती ट्रेन में मेरी उससे मुलाकात हुई। मेरी नई नई नौकरी लगी थी, और मैं कंपनी के काम से कुछ दिनों के लिए नागपुर जा रहा था। वह ट्रेन में बिलासपुर से नागपुर जाने के लिए चढ़ी थी। अचानक की हम दोनो में बातों का सिलसिला चल पड़ा और नागपुर तक का रास्ता बात करते करते ही कटा। हम नागपुर स्टेशन पर एक दूसरे का सामान लेकर इस तरह उतरे जैसे दोनो साथ साथ आए हो। मैं नागपुर पहली बार आया था, वह नागपुर में पढ़ती थी और उसे अपने होस्टल जाना था। उसने मुझे एक होटल तक पहुँचाया और अपने होस्टल चली गयी। जाते वक़्त फिर मिलने का आश्वासन था। मुझे आश्चर्य मिश्रित प्रसन्नता हो रही थी। अपनी किस्मत पर भरोसा नहीं कर पा रहा था। 

Mandatory registration of IMEI numbers

I came across information related with mobile rule in Turkey. All IMEI numbers of locally sold mobile phones are registered at service providers’ network. Any foreign phone, with non-registered IMEI number can work without any issue, if it is using its original foreign network SIM card. That would come under international roaming and user will have to pay stiff charges as per international roaming rates. But if someone visiting the country with foreign phone and try to use the local SIM card, it will be blocked within days as that would be categorized as non-registered IMEI number. So, you have 3 options for mobile phone use in Turkey: You can use a foreign phone and SIM card, and pay international roaming charges for all your calls. You can buy a phone at local store, along with a local SIM card. There are places in Turkey where you can get phones on rent as well. This option is like anyone using a local phone. You have to register your phone (basically its IMEI number) with authorit…

How can we educate India?

India has very low literacy rate, and that is responsible for most of our social issues. With explosion of population, we have millions of uneducated people who can easily be manipulated. This is the reason we still see racial or religious issues taking front row in any election. Most of the people vote for caste and religion rather that candidate’s ability or development agenda. It’s not that they don’t want to, but due to lack of education or proper education, they just can’t judge the candidates based on merit. Similarly, honor killing, rape, dowry and all such social evils are also indirectly related to our education system. If you educate people from their childhood, and provide proper guidance abut such social evils, you should be able to minimize such problems, if not eradicate it. 
Our budget allocates less than 4% to Education sector. This is very less money to even take care of primary education in our vast country. Then we already have so many grants going out to the exist…

जगत जननी दुर्गा मेरी माँ (A short story in Hindi)

आज पहली बार इतने सारे बच्चों को अच्छे अच्छे कपड़े पहने हुए खिलखिलाते और दौड़ते भागते हुए देख उसे आश्चर्य हो रहा था। अपने अनाथालय में बाकी के २५ बच्चों के साथ रहते हुए वह ख़ुश थी। वह भी खेलती कूदती थी उनके साथ। स्कूल भी जाती थी। परंतु यहाँ के बच्चों की ख़ुशी और उसकी ख़ुशी में बहुत अंतर था। यहाँ के बच्चों की ख़ुशी में एक अनजानी सी बेतकल्लुफ़ सी भावना थी, जैसे उन्हें किसी चीज़ की चिंता ही ना हो। बस कुछ चाहिए तो अपनी माँ के पास पहुँच कर जिद करने लगते थे। उसकी माँ तो थी नहीं, अतः यह एहसास भी एक नया सा था, की कोई ऐसा भी हो सकता है जो आपकी नाजायज़ जिद पर भी आपको प्यार से देखे और आपकी उस जिद को पूरा करे। यह नन्हें नन्हें बच्चे क्या जाने की उसके पास माँ तो ना थी, पर माँ जैसी भी कोई नहीं थी। अनाथालय में उन बच्चों की देखभाल करने वाली दीदी की उम्र भी इतनी नहीं थी की उसे वह माँ जैसी समझ पाती। वह दीदी हमेशा इस उधेड़बुन में लगी रहती थी की सभी बच्चों के पालन पोषण का इंतजाम कैसे हो। अनाथालय में ख़ुशियाँ तो थी, परंतु कल की चिंता भी छाई रहती थी उन ख़ुशियों पर। उसे भी पता था दीदी की मज़बूरियों के बारे म…

Thank You Team India

Today, World Cup Cricket 2015 ended for us. We lost to Australia in Semi Final, and are out of game. I am not going to analyze the game, and provide insight on why we lost, and what we could have done better. Every cricket fan knows what went wrong, and everyone has opinion, suggestions and what not, about how we could have won. So, there is no point writing about it. 
I am going to write about my feelings, and good feelings, proud feelings about our team. The Indian cricket team. The M S Dhoni and his boys in Blue! They lost the game, but won our heart! The overall performance in this tournament by our team was outstanding. They came as a weak team, and no one was even ready to accept that they will reach Quarter Finals. I remember, their first game was with Pakistan, and we were wishing for that one match win. No one was expecting team India to defend their title. This was because of their recent bad performance in Australia. The team was not at all in form, and was losing matches …

अंतिम निर्णय (A short story in Hindi)

"उसकी आत्मा इस शरीर में कैद है। आप उसे मुक्ति दे दीजिए ताकि वो एक नया शरीर पा सके।"
इन शब्दों ने रामलाल को अपने विचारों से बाहर खींचा। वो एक ऐसे प्रश्न का उत्तर ढूँढने की कोशिश कर रहे थे, जो कभी उत्तरित हुआ ही ना हो। कैसे एक पिता अपने जवान पुत्र के मृत्युनामे पर स्वीकृति दे सकता है?
उनके सामने रखा था वह कागज़, जिसपर कृत्रिम श्वास नलिका हटाए जाने पर उन्हें स्वीकृति के हस्ताक्षर करने थे। हलके हवा के झोंके से वह कागज़ फड़फड़ा रहा था। मानो आत्मा शरीर से निकलने की कोशिश कर रही हो। उसी फड़फड़ाहट की आवाज़ के साथ सिनेमा के प्रोजैक्शन रूम में चली रही मशीन की तरह उनकी आँखों में चल-चित्र की भाँति चल रहा था उनके पुत्र का जीवन।
बचपन की शरारत की झलकियों ने उनके चेहरे पर इस दुखद घड़ी में भी मुस्कान फेर दी। फिर जवानी की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी, देर रात तक घर से बाहर और अपने साथ हुई तू तू मैं मैं याद करते करते मन में एक बार फिर मोह से प्रेरित आवाज़ उठी।
"नहीं, मैं अपने बेटे को नहीं मार सकता। वो अभी ज़िंदा है। वो ठीक हो सकता है। मुझे और कोशिश करनी चाहिए।"

Amitabh Bachchan – A Super Star we love but don’t go to watch his movies

Amitabh Bachchan is Super Star, or the living legend or Star of the millennium or not sure whatever names given to him. But, that does not translate to the box office register. People don’t go and watch his movies. They like him; there is no doubt about it. His game show KBC is a hit, his appearances on other TV reality shows are liked by people, his advertisements are hit, but his movies are not. 

This is interesting to note, that he still command a large fan followings, and ranked #3 in Times of India Celebrity Index in January 2015. He has always been in Top 10, and was #1 in April 2014. 
He has 13.6 million followers on Twitter, 19.8 million followers on Facebook, and his blog is also read by millions of people regularly, including media giants. Anything he says, post or share becomes news, as media recognize that people do like to read or see him in news.  

रेखाएँ (A short poem in Hindi)

This poem is about the lines drawn by artists on paper. I am a comics fan, and this short poem is dedicated to the lines drawn by comics artists to create new and magical world on paper. Once these lines are drawn on black pages, these pages will tell you a story with heroes, villains, and the story will have its own world, with various emotions, drama etc. to entertain us. The artist simply creates a new world of possibilities with few lines. This message is expressed in the poem presented. 




कुछ रेखाएँ कोरे कागज़ पर पड़कर,
उस कागज़ का रूप बदल देती है।

India’s Daughter – A mirror to our society

Today is international Women’s Day, and BBC wanted to launch their new documentary India’s Daughter today all over the world. This documentary is banned by Indian government, but still available at various platforms, and lots of people have seen it. I think the ban is not justified, as it is like banning a mirror which shows our true face. It’s more like few of those discussions we always try to avoid. This documentary brings out the topics which we don’t want to discuss. So, the better way to avoid such discussions is to ban it, and no one will talk about it. 
The documentary is not offering anything new to the Indian viewer. We all more or less know these things already. To put everything into context before we discuss this, here is a summary of what is shown in the documentary.

होली का उपहार (A short story in Hindi)

कल होली है। आज ऑफिस से निकाल कर घूमते घूमते मुख्य बाज़ार तक पहुँच गया। मैं अपने घर से दूर यहाँ एक अनजान शहर में पिछले २ सप्ताह से पड़ा हुआ था। अकेले यहाँ किसके साथ होली खेलता? घर वाले तो फिर भी होली खेल ही लेंगे। बार बार मन में एक ही खयाल आ रहा था, यदि अभी मैं घर पर होता तो शायद बच्चों के साथ बाज़ार में होता। वो अपनी पसंद के रंग और पिचकारियाँ खरीदने के लिए जिद कर रहे होते, और मैं दुकान वाले से भाव ताव करके उनके लिए रंग-पिचकारी एवं अपने लिए गुलाल ले रहा होता। आजकल पिचकारियाँ भी तो अलग अलग तरह की आ गयी है। कुछ में तो पानी के लिए अलग से डिब्बे लगे हुए है।  सोचते सोचते मेरी निगाह रंग बिरंगी पिचकारियों से सजे दुकानों से होती हुई पास खड़े कुछ बच्चों पर पड़ी, जो बड़ी ही लालसा भरी निगाहों से उन दुकानों को देख रहे थे। कुल ५ बच्चे थे, तकरीबन ६ से ८ वर्ष की उम्र के। उनकी वेश भूषा देख कर ऐसा लगता था की वह बहुत गरीब परिवार से थे, या शायद भिखारी भी हो सकते थे। तुरंत ही मैंने अपने आप को दुरुस्त किया। यदि वो भिखारी होते तो दूर से ललचाई निगाहों से निहारने की बजाय वो दुकानों से ख़रीदारी करने वालों लोग…

होलिका दहन (A short story in Hindi)

आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं। इस अवसर पर एक छोटी सी कथा प्रस्तुत कर रहा हूँ, होलिका दहन, जिसमे कोशिश की है होलिका के अंतर्द्वंद्व की झलक प्रस्तुत करने की। उम्मीद है आप इसे पसंद करेंगे। 

होलिका के मन में एक अंतर्द्वंद्व चल रहा था। आज उसे अपने वरदान का उपयोग करके एक बच्चे की हत्या करनी थी। और बच्चा भी कौन, उसका अपना भतीजा। बड़े भाई की आज्ञा का पालन करना उसका कर्तव्य था। परंतु क्या जो वो कह रहे थे, वह सही था? क्या प्रह्लाद को अपने प्रभु की वंदना करने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए? स्वयं हिरण्यकश्यप ने भी तो ब्रह्मा की तपस्या की थी, अपने लिए अक्षय जीवन का वरदान लेने के लिए। फिर अगर प्रह्लाद विष्णु की उपासना करता है, तो इसमें गलत क्या है? 
परंतु वह जानती थी कि अहंकार में डूबे उसके भाई को उचित अनुचित या तार्किक बात समझ में नहीं आएगी। उसे पता था कि यदि वह अपने भाई की आज्ञा का उलंघन करती है, तो उसके भाई के अहंकार को ठेस पहुँचेगी, एवं उसके क्रोध के प्रकोप से वह भी नहीं बचेगी। 
होलिका ने एक निश्चय किया, उसने अपने हृदय को कठोर कर लिया था। अब उसे पता था कि उसे क्या करना है। अपने भाई की आज्ञा क…

Shiv and Shankar - The Supreme Power and The Destroyer

People always think that Shiv and Shankar is same, which is not true. Shiv is actually creator of Shankar. Even devotees who spend their whole life worshiping Shankar or Shiv, thinks that they are one and same. This is as common a mistake as calling our religion Hindu, whereas there is no such word in any of our religious texts. Just like we are Sanatan Dharmi, and not Hindu like popular believe, Shiv and Shankar is different and not one entity.

O Saathi Re - A journey of love...from two solo songs to a lovely duet

Happy Valentine's Day to all of you.

Today, is the day we celebrate love! Love is a wonderful thing; it joins two souls into one! When you are in love with someone, you don’t remain two different individuals, but becomes one. There are lots written about love, so I am not going to fill pages about it again. I know, love is a feeling, you just can’t express it in words, you have to feel it.

So, I decided to show the feeling which is love, by actually letting you feel the power of love. I picked up my all-time favorite song, “O Saathi Re” from Muqaddar Ka Sikandar, which has two original versions. Both were solo versions, one by Asha Bhosle, for the female child artist who represent heroin’s child age in the movie, and another by Kishore Kumar, for the hero. Its worth mentioning here that the movie is inspired by Devdas story, and I think this is one of the much better interpretation of Devdas in modern age. Both songs are great individually, with some similar and some different lyr…

Perumal Murugan - The Author is Dead, Long Live the Author

Do you know about the sudden death of Perumal Murugan, the author? Don’t worry, the Perumal Murugan, teacher is still alive, and will continue to live. But people have killed Perumal Murugan, the Author. This is clearly a major attack on Freedom of Speech, where people have forced the author to commit suicide. It sounds confusing, so let me put some light on him. 
Perumal Murugan is / was a Tamil Nadu-based writer, who has ended his writing career by announcing the death of Perumal Murugan, the author. His post, as reported by media (because I was not able to view his profile on Facebook), read, "Author Perumal Murugan is dead. Only the teacher Perumal would be alive. People could have issues with my other books, that's why I've decided to withdraw them all...I shall pay due compensation to publishers..Don't indulge in protests and let me go."

व्यंग चित्र (A short story in hindi)

"पापा, आज भी आप ऑफिस चल दिए? आपको याद हैं ना अपना वादा?"

"हाँ बेटी, अच्छे से याद है, शाम को घर आकार आपके स्कूल के प्रोजेक्ट के लिए हम एक अच्छा सा चित्र बना देंगे।"

"और पापा, मुझे वो आपके अख़बार वाले कार्टून जैसे चित्र नहीं चाहिए। मुझे वो अच्छे नहीं लगते हैं। पता नहीं क्यों आप ऐसे कार्टून क्यो बनाते है!"

"बेटी, तुम अभी छोटी हो, जब थोड़ी बड़ी हो जाओगी तब समझ जाओगी। वो कार्टून बच्चों के लिए नहीं बड़ों के लिए होते है।"

"पर बड़े लोग तो कार्टून पसंद नहीं करते! तभी तो अक्सर आपके बारे में भी बुरा भला कहते रहते है। फिर क्यों आप उनके लिए कार्टून बनाते हो?"

रेस्त्राँ (A Short Story)

बाहर बारिश हो रही थी। उस बारिश में दो बच्चे भीगते हुए नाच रहे थे। उनकी मस्ती बारिश की बूँदों के साथ इधर उधर छिटक रही थी। भीगने से बचने के लिए मैंने रेस्त्राँ के अंदर शरण ली। अंदर बैठते हुए एक चाय की मांग की। आज की घटनाओं से मेरा मन खिन्न हो चला था। उन दिनों कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा था। फिर आज का दिन तो शायद मेरे लिए बहुत ही खराब था। चाय के इंतज़ार में बैठे मेरा दिमाग अपने जीवन की परेशानियों उलझ गया।  वैसे तो अकेले बैठ कर बहुत सी अलग अलग कहानियाँ अपने आस पास देखने को मिलती है। परंतु रेस्त्राँ की उस भिड़ में भी मेरा मन कहीं और भटका हुआ था। 

TnT – Taranath Tantrik – City of Sorrows

I read both part of Taranath Tantrik - City of Sorrow, and to summarize it, I can only say that I just can’t wait for the third installment. Brilliant story, keeps you gripped till the last page in both part. I will not discuss spoilers here. The story is about a Psychic Taranath Tantrik working with his friends Shankar, a CID office, Sneha, a TV journalist and  Vibhuti, a horror novelist, in an investigation, where someone is trying to change the City of Joy Kolkata into City of Sorrows. 
First part shows glimpse into Taranath’s past, and cut to present day for main story to develop. The second part again shows villain’s past, and then move to current day. So, the first one introduced TnT to us, and started chain of events which makes the story. Then second part introduced the villain to us, and the story progressed.  I liked this type of storytelling, which gives you a glimpse of main character’s past, and then jumps directly to the story. Shamik Dasgupta has once again written a b…

Charlie Hebdo - Freedom to Live, and not Freedom of Speech!!!!

I don't support derogatory cartoons, and last year I was opposing the series made by Aseem Trivedi, which shows our national symbols in a very derogatory way. But I can never support terrorism and killing people! I have problem with lots of people who post loads of rubbish on their wall, say insulting things in newspapers or TV etc. But I don't go out and kill them! I don't support Charlie Hebdo, but I strongly oppose the attack and murders!

गर्व

सर्दियों की वह अलसाई सुबह। ऐसा लग रहा था मानो सुबह भी देर तक सोना चाह रही हो। आकाश धीरे धीरे लाल उजाला फैलाने लगा था। मैं रात भर की अपनी नौकरी के बाद घर की ओर जा रहा था। कहने को सुबह में अलसायापन था। परंतु कुछ लोग अपने कार्यो में लग चुके थे। कही अख़बार वाले गट्ठर लेकर अपनी दुकान लगाने में जुटे थे, तो कही सफ़ाई वाले झाड़ू लेकर सड़क साफ़ कर रहे थे। मुंबई में सर्दियाँ हलकी फुलकी ही होती है। यहाँ दिल्ली वाली कड़ाके की ठंड नहीं पड़ती। फिर भी भोर में इतनी ठंड तो रहती है की आप अपने में सिमट जाए।

तुशा – कहानियाँ भावनाओं की

आप सभी को नव वर्ष २०१५ की हार्दिक शुभकामनाएँ. 

नव वर्ष के इस अवसर पर मैं अपना फेसबुक पेज तुशा आप लोगो के समक्ष रख रहा हूँ. मुझे लिखने का शौक़ हैं, परंतु कभी अपनी रचना को किसी के साथ साझा नहीं किया. गाहे बगाहे अपने ब्लॉग पर अपनी लिखी हुई कहानियाँ प्रेषित कर देता था. परंतु शायद ही किसी ने उन कहानियों को पढ़ा हो. गत वर्ष अक्टूबर के महीने में यह ख़याल आया की क्यों न फेसबुक पर एक पृष्ठ बनाया जाए, सिर्फ़ उन कहानियों के लिए. ब्लॉग पर तो कहानियों के अलावा और भी बहुत कुछ होता है. ऐसा प्रतीत हुआ की शायद मैं उन लिखे हुए शब्दों को राहत दूँगा, एक ऐसे मंच पर लाकर जहाँ बहुत से लोगो की पहुँच उन तक होगी. इससे पहले मुझे लगता था की शायद मेरा इस तरह से सभी के सामने उन कहानियों को लाना ठीक नहीं होगा. परंतु उन शब्दों में छिपे भावों को अगर मैं बंद रखता हूँ, तो यह उनके साथ अन्याय होगा. अपनी झिझक एवं शर्म को दरकिनार करते हुए यह फ़ैसला लिया गया की अब उन कहानियों को कैद में नहीं रखा जाएगा.